अफ़सोस


एक शायर ने ख़ूब कहा —
“दिल मिले या न मिले,
हाथ मिलाते रहिए”
लेकिन अफ़सोस इस बात का कि
आजकल लोग हाथ भी नहीं मिलाते
और जो चंद लोग मिलाते हैं
दिल को चोट पहुँचाते हैं

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