“Kyun Main Jaagoon” | Patiala House | Akshay Kumar


मुझे युही करके ख्वाबो से जुदा
जाने कहा छुपके बैठा है खुदा
जानू ना मैं कब हुआ खुद से गुमशुदा
कैसे जीयु रूह भी मुझसे है जुदा
क्यू मेरी राहे, मुझसे पूछे घर कहा है
क्यू मुझसे आके, दस्तक पूछे दर कहा है
राहे ऐसी जिनकी मंजिल ही नहीं
दूँढो मुझे अब मैं रहता हूँ वही
दिल है कही और धड़कन है कही
सांसे है मगर क्यू जिन्दा मैं नहीं

रेत बनी हाथो से यु बह गयी
तकदीर मेरी बिखरी हर जगह
कैसे लिखू फिर से नयी दास्तान
ग़म की स्याही दिखती हैं कहा
आहे जो चुनी हैं मेरी थी रजा
रहता हु क्यू फिर खुद से ही खफा
ऐसे भी हुई थी मुझसे क्या खता
तूने जो मुझे दी जीने की सजा

बन्दे तेरे माथे पे है जो खींचे
बस चदं लकीरों जितना है जहाँ
आंशु मेरे मुझको मिटा कह रहे
रब्ब का हुकुम ना मिटता है यहा
राहे ऐसी जिनकी मंजिल ही नहीं
दूँढो मुझे अब मैं रहता हु वही
दिल है कही और धड़कन हैं कही
सांसे हैं मगर क्यू जिन्दा मैं नहीं
क्यों मैं जागु और वो सपने बो रहा हैं
क्यों मेरा रब यु आँखे खोले सो रहा है, क्यों मैं जागु

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