Description
“शब्दों की दुनिया में बसती हूं,
जो हृदय कहे वही लिखती हूं,
अभी सिखना बहुत बाकी है …
तृष्णा शेष है, सकल संसार मेरा साकी है।
किंचित अनुभवों का संचय, तन ‘ सवि ‘,
मन कवि, बस, यही मेरा परिचय !!”
© सविता पाटील ऐसी कविताएं और गजलें जिन्हें सुनकर आपको लगे ये आपके लिए ही हैं।
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